केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में नेशनल काउंसिल (NC-JCM) के सचिव शिवा गोपाल मिश्रा ने 8वें वेतन आयोग को एक पत्र भेजकर ज्ञापन जमा करने की प्रक्रिया और कर्मचारियों की सुविधाओं से जुड़ी 9 प्रमुख मांगें रखी हैं।
NC-JCM द्वारा रखी गई 9 प्रमुख मांगें:
- शब्द सीमा में बढ़ोतरी: वर्तमान में सुझावों के लिए 500 शब्दों की सीमा है। यूनियन ने इसे बढ़ाकर 1000 शब्द करने की मांग की है ताकि विस्तृत जानकारी दी जा सके।
- सब-क्वेश्चन का प्रावधान: मुख्य विषयों के अंदर आने वाले उप-प्रश्नों के लिए व्यवस्थित जवाब देने की सुविधा हो।
- पेंशन सुधार (OPS की बहाली): NPS और UPS की समस्याओं को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की पुरजोर मांग की गई है।
- पेंशनभोगियों के लिए अलग सेक्शन: पेंशन रिवीजन, समानता और कम्यूटेड पेंशन की जल्द बहाली जैसे मुद्दों के लिए विशेष प्रावधान हो।
- महिला कर्मचारियों का कल्याण: चाइल्ड केयर लीव (CCL), मातृत्व लाभ और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे विषयों के लिए अलग अनुभाग की मांग।
- विभाग-विशिष्ट प्रावधान: अलग-अलग मंत्रालयों की अपनी विशेष समस्याएं होती हैं, इसलिए विभाग-वार सुझाव जमा करने की अनुमति मिले।
- समय सीमा का विस्तार: ज्ञापन जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 मई 2026 करने का प्रस्ताव है।
- अटैचमेंट साइज: डेटा और रिपोर्ट अपलोड करने के लिए फाइल साइज की सीमा 2 MB से बढ़ाकर 10 MB की जाए।
- जमा करने के विकल्प: ऑनलाइन पोर्टल के साथ-साथ ईमेल और हार्ड कॉपी के माध्यम से भी ज्ञापन स्वीकार किए जाएं।
अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे और मांगें:
यूनियनों ने वेतन और प्रमोशन के ढांचे में भी बड़े बदलावों की अपेक्षा की है:
- फिटमेंट फैक्टर: न्यूनतम बेसिक पे में बढ़ोतरी के लिए इसे 3.0 से 3.25 के बीच रखने की मांग।
- सालाना इंक्रीमेंट: कम से कम 6% वार्षिक वेतन वृद्धि।
- पेंशन कम्यूटेशन: इसकी अवधि 15 साल से घटाकर 11-12 साल करना।
- प्रमोशन: 30 साल की सेवा के दौरान कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित करना।
8वें वेतन आयोग का वर्तमान अपडेट (अप्रैल 2026)
8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और वर्तमान में विभिन्न कर्मचारी संगठन अपने सुझाव जमा कर रहे हैं। फिटमेंट फैक्टर और पेंशन योजना का भविष्य इस आयोग के सबसे संवेदनशील और बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
निष्कर्ष: कर्मचारी यूनियनों की ये मांगें प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए हैं। यदि ये मांगें मानी जाती हैं, तो भविष्य में कर्मचारियों की सैलरी और रिटायरमेंट बेनिफिट्स में ऐतिहासिक सुधार देखने को मिल सकते हैं।
